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Tuesday, 23 June 2020




लद्दाख की गलवां घाटी

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लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी खुफिया मूल्यांकन के अनुसार, पिछले सप्ताह गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमले का आदेश एक वरिष्ठ चीनी जनरल ने दिया था। इस घटना में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए। झड़प के बाद से ही एशिया के दो सबसे बड़े मुल्कों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। 



पश्चिमी थिएटर कमांडर के जनरल झाओ जोंग्की और सेना के अन्य दिग्गज अभी भी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को सेवा दे रहे हैं। इन्हीं लोगों ने लद्दाख की गलवां घाटी में पीएलए को सैन्य ऑपरेशन करने की अनुमति दी थी। मूल्यांकन से परिचित एक स्रोत ने नाम न छापने की शर्त पर इसकी जानकारी दी है।




सूत्रों ने बताया कि झाओ ने नई दिल्ली सहित अमेरिका के अन्य सहयोगियों के आगे चीन के कमजोर पड़ने पर चिंता व्यक्त की थी और उन्होंने पीएलए को सैन्य गतिविधि का आदेश इसलिए दिया ताकि भारत को एक सबक दिया जा सके।

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मूल्यांकन ने पिछले सप्ताह जो कुछ हुआ उसके बारे में चीन के बाद के दावों का खंडन किया है। साथ इस बात की ओर इशारा किया कि यह हिंसक झड़प तनाव का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह बीजिंग द्वारा भारत को अपनी ताकत का संदेश भेजने का एक उद्देश्यपूर्ण निर्णय था।

इस मूल्यांकन में बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए, जबकि 35 चीनी सैनिक मारे गए। इसके अलावा दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के कई जवानों को हिरासत में लिया, लेकिन उन्हें बाद में छोड़ दिया गया।





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हालांकि, चीन की यह योजना उसी पर भारी पड़ गई, क्योंकि इस घटना के बाद भारत में बड़े पैमाने पर चीन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए, जो अभी भी जारी हैं। इसके अलावा, बीजिंग द्वारा भारत को अधिक जवाबदेह बनाने वाले प्रयासों पर भी पानी फिर गया, क्योंकि स्थिति को देखते हुए अब अमेरिका भारत के ज्यादा करीब आ गया है। इस तरह, भारत और अमेरिका का करीब आना चीन के लिए खतरे की घंटी है।

भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद से भारत में लोगों द्वारा चीनी उत्पादों के बहिष्कार का दौर शुरू हो गया है। बहुत से लोग चीनी सोशल मीडिया एप टिक-टॉक को डिलीट कर रहे हैं और चीनी मोबाइल फोन को तोड़ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि भारतीय नागरिकों की यह प्रतिक्रिया चीन की सोच के बिल्कुल विपरीत है। यह चीन की सेना की जीत नहीं है।




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